ईद-ए-मिलाद-उन-नबी: जानिए इस मुकद्दस दिन का महत्व, इतिहास और पैगाम
इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने यानी 'रबी-उल-अव्वल' (Rabi al-Awwal) की 12 तारीख को पूरी दुनिया में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (Eid Milad-un-Nabi या Mawlid) का पर्व अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाया जाता है। यह दिन पैगंबर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के यौम-ए-पैदाइश (जन्मदिन) के रूप में याद किया जाता है।
इस्लाम धर्म में इस दिन का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि पैगंबर साहब ने दुनिया को इंसानियत, अमन, रहमदिली, भाईचारे और इंसाफ की राह दिखाई।
1. ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का इतिहास
इस्लामी इतिहास के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्म अरब के मशहूर शहर मक्का मुअज्जमा में 570 ईस्वी में रबी-उल-अव्वल महीने की 12 तारीख को हुआ था।
- उनके पिता का नाम हज़रत अब्दुल्लाह और वालिदा (माता) का नाम हज़रत आमिना था।
- उन्हें पूरी दुनिया के लिए 'रहमतुल-लिल-आलमीन' (तमाम जहानों के लिए रहमत यानी दया का स्रोत) बनाकर भेजा गया था।
- 40 वर्ष की आयु में अल्लाह ताला की तरफ से उन पर पवित्र कुरआन नाजिल (उतरना) होना शुरू हुआ।
2. इस दिन का आध्यात्मिक महत्व
यह दिन केवल एक जश्न नहीं, बल्कि आत्म-मंथन और पैगंबर साहब की दी गई नेक शिक्षाओं (सुन्नत) को अपनी ज़िंदगी में उतारने का अवसर है।
- इंसानियत और रहम: पैगंबर साहब ने हमेशा यतीमों, गरीबों, पड़ोसियों और मजलूमों की मदद करने का हुक्म दिया।
- अमन और शांति: इस्लाम का मूल अर्थ ही शांति और सलामती है। यह दिन सभी समुदायों के बीच प्रेम और भाईचारा बढ़ाने का संदेश देता है।
- सादगी और सच्चाई: जीवन में सच बोलना, ईमानदार रहना और बड़ों का आदर करना उनकी शिक्षाओं का प्रमुख हिस्सा है।
3. ईद-ए-मिलाद-उन-नबी कैसे मनाई जाती है?
- दुआ और इबादत: लोग मस्जिदों और घरों में नमाज़ अदा करते हैं, कुरआन-ए-पाक की तिलावत करते हैं और पूरी दुनिया में शांति और खुशहाली के लिए दुआएं मांगते हैं।
- मिलाद और महफ़िल: पैगंबर साहब की शान में नात-शरीफ पढ़ी जाती है और उनकी सीरत (जीवन चरित्र) व संदेशों पर बयान होते हैं।
- जुलूस (जुलूस-ए-मोहम्मदी): कई शहरों में हाथों में हरे और सफेद झंडे लेकर शांतिपूर्ण जुलूस निकाले जाते हैं, जिसमें दरूद-ओ-सलाम के नारे लगाए जाते हैं।
- खैरात और लंगर: गरीबों, जरूरतमंदों और पड़ोसियों को खाना खिलाया जाता है और मीठे पकवान (जैसे खीर व शीर खुरमा) बांटे जाते हैं।
ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का मुख्य पैगाम:
यह मुकद्दस दिन हमें याद दिलाता है कि नफरत को मोहब्बत से, बुराई को अच्छाई से और अंधेरे को इल्म (ज्ञान) की रोशनी से ही मिटाया जा सकता है।

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