राहुकाल क्या है? जानिए राहुकाल का समय और इस दौरान क्या करें और क्या न करें
भारतीय ज्योतिष और हिंदू पंचांग में शुभ मुहूर्त जितना महत्वपूर्ण माना गया है, उतना ही ध्यान अशुभ समय यानी राहुकाल (Rahukaal) पर भी दिया जाता है। किसी भी शुभ या नए कार्य की शुरुआत करने से पहले राहुकाल का विचार करना बहुत जरूरी माना गया है।
राहुकाल क्या होता है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, राहु को एक छाया ग्रह माना जाता है जिसका स्वभाव उथल-पुथल, भ्रम और बाधाएं पैदा करना है। दिन के 24 घंटों में से हर दिन लगभग 90 मिनट (1.5 घंटे) का एक ऐसा समय होता है, जिस पर राहु ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक रहता है। इसी समय को राहुकाल कहा जाता है।
सप्ताह के सातों दिन राहुकाल का अनुमानित समय
राहुकाल का समय स्थानीय सूर्योदय के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, लेकिन सामान्यतः यह इस प्रकार रहता है:
- सोमवार: सुबह 07:30 AM से 09:00 AM तक
- मंगलवार: दोपहर 03:00 PM से 04:30 PM तक
- बुधवार: दोपहर 12:00 PM से 01:30 PM तक
- गुरुवार: दोपहर 01:30 PM से 03:00 PM तक
- शुक्रवार: सुबह 10:30 AM से 12:00 PM तक
- शनिवार: सुबह 09:00 AM से 10:30 AM तक
- रविवार: शाम 04:30 PM से 06:00 PM तक
राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए?
- नए व्यापार की शुरुआत: दुकान, ऑफिस या नया व्यापार शुरू करने से बचें।
- महत्वपूर्ण लेन-देन: बड़ा आर्थिक लेन-देन, धन निवेश या कर्ज देने-लेने से बचना चाहिए।
- सोना या वाहन खरीदारी: नया वाहन, आभूषण या मकान-जमीन की रजिस्ट्री इस समय नहीं करनी चाहिए।
- मांगलिक कार्य: विवाह चर्चा, सगाई, गृह प्रवेश या कोई बड़ा धार्मिक संकल्प इस दौरान न लें।
- यात्रा की शुरुआत: किसी महत्वपूर्ण यात्रा पर निकलने से पहले राहुकाल समाप्त होने की प्रतीक्षा करें।
राहुकाल में क्या किया जा सकता है?
- जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें राहुकाल में जारी रखा जा सकता है; केवल नए काम की शुरुआत वर्जित है।
- भगवान शिव और भगवान हनुमान जी की पूजा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप राहु के अशुभ प्रभाव को शांत करता है।
- यदि राहुकाल में यात्रा करना बहुत अनिवार्य हो, तो घर से मीठा या तुलसी का पत्ता खाकर निकलना शुभ माना जाता है।

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