कजरी तीज (बड़ी तीज / सातुड़ी तीज) 2026: जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, चंद्र दर्शन समय, व्रत विधि, पौराणिक कथा और अखंड सौभाग्य के उपाय
सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के सबसे प्रमुख और पावन पर्वों में से एक है कजरी तीज (Kajari Teej)। इसे बड़ी तीज, सातुड़ी तीज, कजली तीज या बूढ़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
यह व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती और भगवान शिव की उपासना को समर्पित है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं सुयोग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
आइए जानते हैं कजरी तीज 2026 की सही तिथि, पूजा का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त, चंद्र दर्शन का समय, संपूर्ण पूजा विधि, सातु का महत्व और पौराणिक कथा:
1. कजरी तीज 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date & Auspicious Timings)
वैदिक पंचांग के अनुसार, उदयातिथि को आधार मानकर कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है:
- पर्व की तिथि: 31 अगस्त 2026 (सोमवार)
- पक्ष: भाद्रपद कृष्ण पक्ष
- तिथि: तृतीया
दिन के सर्वश्रेष्ठ पूजा मुहूर्त (शुभ चौघड़िया अनुसार):
- प्रातःकालीन अमृत मुहूर्त: सुबह 05:58 AM से 07:34 AM तक
- शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 09:09 AM से 10:45 AM तक
- प्रदोष काल (संध्याकालीन तीज पूजन): शाम 05:08 PM से 06:44 PM एवं शाम 06:44 PM से 08:08 PM तक (यह समय तीज माता के पूजन और कथा श्रवण के लिए सर्वोत्तम है)
चंद्र दर्शन व अर्घ्य का समय:
- चंद्रोदय समय (Moonrise Time): रात लगभग 08:50 PM से 09:20 PM के मध्य (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है)
2. कजरी तीज का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के दिन ही भगवान शिव ने माता पार्वती के निस्वार्थ प्रेम और तप से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
- अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख: इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन के समस्त क्लेश, मतभेद और बाधाएं समाप्त होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
- सोमवार का दुर्लभ महासंयोग: इस वर्ष कजरी तीज सोमवार के दिन पड़ने से इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि सोमवार स्वयं भगवान भोलेनाथ का प्रिय वार है।
3. कजरी तीज की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
- संकल्प व स्नान: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ लाल, पीले या हरे रंग के वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- तीज माता का तालाब (पाल बनाना): पूजा स्थल पर दीवार के सहारे मिट्टी या गाय के गोबर से छोटा सा तालाब (पाल) बनाएं। उसमें नीम की टहनी (नीमड़ी माता) लगाएं और तालाब में कच्चा दूध व जल भरें।
- दीपक व श्रृंगार: एक घी का दीपक जलाएं। नीमड़ी माता और माता पार्वती को रोली, अक्षत, मेहंदी, काजल, सिंदूर और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
- कथा श्रवण: हाथ में गेहूं या चने के दाने लेकर कजरी तीज की पौराणिक व्रत कथा सुनें या पढ़ें। कथा समाप्त होने पर वे दाने तीज माता को अर्पित करें।
- सातू (पिंडा) पांसना: गेहूं, चावल, जौ या चने की दाल के सत्तू में शुद्ध घी, बूरा (शक्कर) और मेवे मिलाकर बड़ा सा पिंडा (सातू) तैयार किया जाता है। पूजा के समय सातू पर चांदी का सिक्का या सुपारी रखकर विधिवत पूजन किया जाता है।
- चंद्र दर्शन व पारण: रात्रि में जब चंद्रमा उदय हो, तो रोली, अक्षत, कच्चा दूध और जल मिलाकर चंद्रमा को छलनी या चुनरी की ओट से अर्घ्य दें। इसके बाद पति के हाथों से सातू का प्रसाद और जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
4. कजरी तीज पर गाय माता के पूजन का विधान
कजरी तीज के पावन अवसर पर गौ माता की पूजा का विशेष महत्व है:
- पूजा के बाद आटे के सात बड़े पेड़े (लोइयां) बनाएं।
- प्रत्येक पेड़े पर थोड़ा सा घी, गुड़ और भीगी हुई चने की दाल रखें।
- गौ माता को यह भोग खिलाएं, उनके चरण स्पर्श करें और परिक्रमा करके आशीर्वाद लें। इससे पितृ दोष और ग्रह दोष शांत होते हैं।
5. कजरी तीज की पौराणिक व्रत कथा (संक्षेप में)
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण परिवार में ब्राह्मणी ने बड़ी तीज का व्रत रखा और अपने पति से कहा कि मुझे तीज पर सातू चाहिए। ब्राह्मण के पास धन नहीं था, इसलिए वह रात में एक साहूकार की दुकान में घुसा और सिर्फ सवा सेर चने की दाल, घी और शक्कर तौलकर पोटली बनाने लगा।
आहट सुनकर साहूकार और नौकरों ने उसे चोर समझकर पकड़ लिया। जब ब्राह्मण ने सच बताया कि उसने कोई धन या जेवर नहीं चुराया, केवल अपनी पत्नी के तीज व्रत के लिए सवा सेर सातू लिया है, तो साहूकार ने उसकी तलाशी ली। ब्राह्मण की सच्चाई देखकर साहूकार द्रवित हो गया। उसने ब्राह्मण को न केवल भरपूर सातू, वस्त्र और धन दिया बल्कि ब्राह्मणी को अपनी धर्म बहन मान लिया। तीज माता की कृपा से उस गरीब ब्राह्मण का घर हमेशा के लिए धन-धान्य से भर गया।
6. मनोकामना पूर्ति के विशेष उपाय
- दांपत्य प्रेम बढ़ाने के लिए: शाम के समय शिवलिंग पर कच्चा दूध और शहद चढ़ाएं तथा माता पार्वती को लाल गुलाब की माला अर्पित करें।
- संतान व पारिवारिक सुख हेतु: 5 या 7 सुहागिन महिलाओं को सुहाग पिटारी (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी) और मौसमी फल भेंट करें।
- मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए: कुंवारी कन्याएं माता पार्वती को हल्दी की गांठें और पीले फूल अर्पित कर 'ॐ उमामहेश्वराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।
माता पार्वती का अखंड सौभाग्य मंत्र:
"हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्।।"
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